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स्वच्छ भारत       समृद्ध भारत ।

एक सोच प्रकृति की ओर………

मानव की उत्पत्ति से पूर्व ही वृक्षों का जन्म हो चुका था वृक्ष आदि-काल से ही मनुष्य के हितैषी रहे हैं, सभी प्रकार के वृक्ष, पेड़-पौधे मनुष्य समाज के लिए सदैव ही उपयोगी रहे हैं, और मनुष्य के जीवन यापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, वृक्षारोपण से हम वृक्षों की संख्या में वृद्धि कर सकते हैं, नए नए पेड़ लगाना ताकि वे बड़े हो कर वृक्ष का रूप ले, यही वृक्षारोपण है!

वृक्षारोपण कर हम लगातार कम हो रहे वृक्षों एवं वनो को संरक्षित कर सकते हैं, वृक्षों को मनुष्य का सच्चा मित्र कहा जाता है, वृक्ष हम से कुछ न लेते हुए भी हमें बहुत कुछ देते हैं, जो एक सच्चा मित्र ही कर सकता है!

वृक्षों से हमें मीठे, गुण़कारी एवं स्वास्थ्य वर्धक फल प्राप्त होता है जो हमारे दैनिक भोजन का महत्व पूर्ण अंग है, वृक्षों की छाल, पत्ती एवं फूलों आदि से कई विशेष प्रकार की औषधियां बनाई जाती है, जो कई रोगों के इलाज में उपयोग की जाती है, उदहारण के लिए आयुर्वेद की बहुत सी दवाइयों मे नीम की छाल, पत्तीयो एवं तेल का उपयोग किया जाता है, इस प्रकार वृक्षारोपण से ग्रीनहाउस प्रभाव के रोकथाम में सहायता मिलती है, वृक्ष पक्षियों को रहने के लिए घर व खाने के लिए भोजन की व्यवस्था प्रदान करते हैं, ग्रीष्म ऋतु में वृक्षों की छाया में पशु पक्षीयों एवं मनुष्यों को सूर्यताप से बचने की शीतल जगह मिलती है, वृक्षों की जड़ से मृदा अपरदन की क्रिया कम होती है,एवं वृक्ष मृदा मे भूमिगत जल को संचित रखने में सहायक होते हैं, इस प्रकार वृक्षारोपण के अनेक लाभ है, इसलिये प्रति वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह में वृक्षारोपण के लिए विशेष वन महोत्सव मनाया जाता है!

इस प्रकार वृक्ष एक सच्चे मित्र की भांति मनुष्य एवं सम्पूर्ण जीव मंडल की निस्वार्थ निष्पक्ष रूप से सहायता करते हैं, इसलिये सभी को वृक्षारोपण करना चाहिए!

अब प्रश्न है कि वृक्षारोपण की आवश्यकता आखिर क्यों होती है???

इसके उत्तर में हम यह कह सकते है कि वृक्षारोपण की आवश्यकता इसलिए होती है कि वृक्ष सुरक्षित रहे, वृक्ष या वन नहीं रहेंगे तो हमारा जीवन शून्य होने लगेगा. एक समय ऐसा आ जाएगा कि हम जी भी न पायेंगे. वनों के अभाव में प्रकृति का संतुलन बिगड़ जायेगा. प्रकृति का संतुलन जब बिगड़ जाएगा तब सम्पूर्ण वातावरण इतना दूषित और अशुद्ध हो जायेगा कि हम न ठीक से साँस ले सकेंगे और न ठीक से शारीरिक और आत्मिक विकास कुछ न हो सकेगा. इस प्रकार से वृक्षारोपण की आवश्यकता हमें सम्पूर्ण रूप से प्रभावित करती हुई हमारे जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है. वृक्षारोपण की आवश्यकता की पूर्ति होने से हमारे जीवन और प्रकृति का परस्पर संतुलन क्रम बना रहता है!

वृक्षारोपण की आवश्यकता हमारे देश में आदिकाल से ही रही है. बड़ें-बड़े ऋषियों मुनियों के आश्रम के वृक्ष वन वृक्षारोपण के द्वारा ही तैयार किये गए है, महाकवि कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम के अंतर्गत महर्षि कण्व के शिष्यों के द्वारा वृक्षारोपण किये जाने का उल्लेख किया है. इस प्रकार से हम देखते है कि वृक्षारोपण की आवश्यकता प्राचीन कल से ही समझी जाती रही है और आज भी इसकी आवश्यकता ज्यों की त्यों बनी हुई है!

देश को हरा-भरा बनाए रखने के लिए स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद से ही वन महोत्सव का आयोजन किया जाता है । प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है कि वह अपने जीवन में एक वृक्ष अवश्य लगाए । आज का स्वार्थी मानव पेड़ तो काटता गया लेकिन पेड़ लगाना भूल गया जिससे यह समस्या आज इतनी उग्र हो गई ।

वृक्षारोपण के कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देने के लिए लोगों को वृक्षों से होने वाले लाभ से अवगत कराकर पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना होगा| कुछ संस्थाएं तो वृक्षों को गोद लेने की परंपरा भी कायम कर रही है| शिक्षा के पाठ्यक्रम में वृक्षारोपण को भी प्राप्त स्थान देना होगा| पेड़ लगाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना होगा| यदि हम चाहते हैं कि प्रदूषण कम हो एवं हम पर्यावरण की सुरक्षा के साथ सामंजस्य रखते हुए संतुलित विकास की ओर अग्रसर हो, तो इसके लिए हमें अनिवार्य रूप से वृक्षारोपण का सहारा लेना होगा| आज हम सब एके जॉन्स की तरह वृक्षारोपण का संकल्प लेने की आवश्यकता है जो कहते थे “मैं एक पेड़ लगा रहा हूं, जो मुझे अपनी गहरी जड़ों से सामर्थ्य एकत्र करने की शिक्षा देता है”

इसलिए सब लोगों को पेड़ लगाने का संकल्प लेना चाहिए । लोगों को वन-महोत्सव और वृक्षारोपण के अभियान में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए । सरकार उन तत्वों से सख्ती से निबटे जो वृक्षों और वनों की अंधाधुंध कटाई में संलिप्त हैं ।

UTKARSH FOUNDATION ने पर्यावरण का ध्यान रकते हुए एक मुहीम चलाई है पूरे भारत में “125 करोड़ पोधो का पौधारोपण तथा सरक्षण’ जिससे हमारे भारत देश को प्रदूषण मुक़्त तथा हरा भरा बनाया जा सके! आप भी इस मुहीम से जुड़ कर अपना योगदान दे!

स्वच्छ भारत       समृद्ध भारत


UTKARSH FOUNDATION

एक सोच प्रकृति की ओर………

1) जहा हरियाली वहा खुशहाली।

2) पेड़ – पौधे मत करो नष्ट, साँस लेने में होगा कष्ट।

3) आओ बच्चो तुम्हे बताऊँ, बात मै एक ज्ञान की, पेड़ – पौधे ही करते हैं,रक्षा अपनी प्राण की।

4) बच्चा बच्चा उठेंगा, पेड़ लगाकर धरती को सजायेगा।

5) वृक्ष लगाओ, हरियाली लाओ।

6) अगर हम वृक्ष लगायेंगे, वे हमारे काम आयेंगे।

7) पेड़ वर्षा लाते है, गरमी से यह बचाते है।

8) पेड़ हैं जीवन का आधार, इसको मत काटो यार।

9) पेड़ लगाओ देश बचाओ, पेड़ लगाओ जीवन बचाओ, जीवन खुश हाल बनाओ।

10) एक घर, एक पेड़ संतुलन का यही हैं खेल।